श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 1: भगवान के प्रतिष्ठान का प्रारंभ और कृष्ण-संकीर्तन पर निर्देश  »  श्लोक 89
 
 
श्लोक  2.1.89 
সবে হৈলা কৃষ্ণ-প্রেম-আনন্দে মূর্ছিত
হাসেন জাহ্নবী-দেবী হৈযা বিস্মিত
सबे हैला कृष्ण-प्रेम-आनन्दे मूर्छित
हासेन जाह्नवी-देवी हैया विस्मित
 
 
अनुवाद
कृष्ण के प्रेम में मग्न होकर सभी भक्त अचेत हो गए और देवी जाह्नवी विस्मय से मुस्कुराने लगीं।
 
Immersed in the love of Krishna, all the devotees became unconscious and Goddess Jahnavi started smiling in surprise.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)