श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 1: भगवान के प्रतिष्ठान का प्रारंभ और कृष्ण-संकीर्तन पर निर्देश  »  श्लोक 88
 
 
श्लोक  2.1.88 
গৃহের ভিতরে মূর্ছা গেলা গদাধর
কেবা কোন্ দিকে পডে, নাহি পরাপর
गृहेर भितरे मूर्छा गेला गदाधर
केबा कोन् दिके पडे, नाहि परापर
 
 
अनुवाद
गदाधर पंडित कमरे में ही बेहोश होकर गिर पड़े। कोई नहीं जानता था कि कौन किस पर गिरा।
 
Gadadhara Pandita fell unconscious in the room. No one knew who fell on whom.
तात्पर्य
परपरा (शब्द) 'पर' (अन्य) और 'अपरा' (अपना) से मिलकर बना है जिसका अर्थ होता है "खुद और दूसरों के बीच अंतर।"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)