श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 1: भगवान के प्रतिष्ठान का प्रारंभ और कृष्ण-संकीर्तन पर निर्देश  »  श्लोक 86
 
 
श्लोक  2.1.86 
ভাঙ্গিল গৃহের স্তম্ভ প্রভুর আবেশে
’কোথা কৃষ্ণ?’ বলিযা পডিলা মুক্ত কেশে
भाङ्गिल गृहेर स्तम्भ प्रभुर आवेशे
’कोथा कृष्ण?’ बलिया पडिला मुक्त केशे
 
 
अनुवाद
भगवान के दबाव से घर का खंभा टूट गया। जैसे ही वे ज़मीन पर गिरे, उनके बाल बिखर गए और वे विलाप करने लगे, "कृष्ण कहाँ हैं?"
 
The pillar of the house broke under the Lord's pressure. As he fell to the ground, his hair scattered and he began to lament, "Where is Krishna?"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)