श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 1: भगवान के प्रतिष्ठान का प्रारंभ और कृष्ण-संकीर्तन पर निर्देश  »  श्लोक 85
 
 
श्लोक  2.1.85 
“পাইনু, ঈশ্বর মোর কোন্ দিকে গেলা?”
এত বলি’ স্তম্ভ কোলে করিযা পডিলা
“पाइनु, ईश्वर मोर कोन् दिके गेला?”
एत बलि’ स्तम्भ कोले करिया पडिला
 
 
अनुवाद
"मैंने अपने प्रभु को प्राप्त कर लिया, परन्तु, हे प्रभु, वे कहाँ चले गए?" ऐसा कहकर प्रभु एक खंभा पकड़े हुए भूमि पर गिर पड़े।
 
"I have found my Lord, but, O Lord, where has He gone?" Saying this, the Lord fell to the ground, holding a pole.
तात्पर्य
"हाय, मैं कृष्ण को प्राप्त हुआ, लेकिन अब वे मुझे छोड़कर चले गए।" इस तरह बोलते हुए, प्रभु ने कृष्ण के लिए प्रेम में घर के एक खंभे को कसकर गले लगाया।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)