श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 1: भगवान के प्रतिष्ठान का प्रारंभ और कृष्ण-संकीर्तन पर निर्देश  »  श्लोक 83
 
 
श्लोक  2.1.83 
পরম-আনন্দে সবে করেন সম্ভাষ
প্রভুর নাহিক বাহ্য-দৃষ্টি-পরকাশ
परम-आनन्दे सबे करेन सम्भाष
प्रभुर नाहिक बाह्य-दृष्टि-परकाश
 
 
अनुवाद
सबने बड़ी प्रसन्नता से उनका अभिवादन किया, परन्तु भगवान ने कोई बाह्य दर्शन नहीं दिया।
 
Everyone greeted him with great joy, but the Lord did not give any external darshan.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)