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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 1: भगवान के प्रतिष्ठान का प्रारंभ और कृष्ण-संकीर्तन पर निर्देश
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श्लोक 68
श्लोक
2.1.68
যে ভক্তি দেখিলু আমি তাহান নযনে
তাহানে মনুষ্য-বুদ্ধি নাহি আর মনে
ये भक्ति देखिलु आमि ताहान नयने
ताहाने मनुष्य-बुद्धि नाहि आर मने
अनुवाद
“मैंने उनमें जो भक्ति देखी है, उसके कारण अब मैं उन्हें एक साधारण मनुष्य नहीं मानता।
“Because of the devotion I have seen in him, I no longer consider him an ordinary man.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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