श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 1: भगवान के प्रतिष्ठान का प्रारंभ और कृष्ण-संकीर्तन पर निर्देश  »  श्लोक 67
 
 
श्लोक  2.1.67 
শেষে যে বলিযা’কৃষ্ণ’ কান্দিতে লাগিলাহেন
বুঝি,—গঙ্গাদেবীআসিযা মিলিলা
शेषे ये बलिया’कृष्ण’ कान्दिते लागिलाहेन
बुझि,—गङ्गादेवीआसिया मिलिला
 
 
अनुवाद
"तब अंततः वे कृष्ण का नाम पुकारते हुए आँसू बहाने लगे। ऐसा प्रतीत हुआ मानो स्वयं गंगा उनकी आँखों से बह रही हों।
 
"Then finally he began to cry out in tears, calling out Krishna's name. It seemed as if the Ganges itself was flowing from his eyes.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)