श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 1: भगवान के प्रतिष्ठान का प्रारंभ और कृष्ण-संकीर्तन पर निर्देश  »  श्लोक 66
 
 
श्लोक  2.1.66 
সর্ব অঙ্গে ধাতু নাহি, হৈলা মূর্ছিত
কত-ক্ষণে বাহ্য-দৃষ্টি হৈলা চমকিত
सर्व अङ्गे धातु नाहि, हैला मूर्छित
कत-क्षणे बाह्य-दृष्टि हैला चमकित
 
 
अनुवाद
जब वे अचेत हुए, तो उनके शरीर में जीवन का कोई निशान नहीं था। थोड़ी देर बाद, एक चौंकी हुई हरकत के साथ, उन्हें बाहरी चेतना वापस आ गई।
 
When he fell unconscious, there was no sign of life in his body. After a while, with a startled movement, he regained external consciousness.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)