vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री चैतन्य भागवत
»
खण्ड 2: मध्य-खण्ड
»
अध्याय 1: भगवान के प्रतिष्ठान का प्रारंभ और कृष्ण-संकीर्तन पर निर्देश
»
श्लोक 66
श्लोक
2.1.66
সর্ব অঙ্গে ধাতু নাহি, হৈলা মূর্ছিত
কত-ক্ষণে বাহ্য-দৃষ্টি হৈলা চমকিত
सर्व अङ्गे धातु नाहि, हैला मूर्छित
कत-क्षणे बाह्य-दृष्टि हैला चमकित
अनुवाद
जब वे अचेत हुए, तो उनके शरीर में जीवन का कोई निशान नहीं था। थोड़ी देर बाद, एक चौंकी हुई हरकत के साथ, उन्हें बाहरी चेतना वापस आ गई।
When he fell unconscious, there was no sign of life in his body. After a while, with a startled movement, he regained external consciousness.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×