श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 1: भगवान के प्रतिष्ठान का प्रारंभ और कृष्ण-संकीर्तन पर निर्देश  »  श्लोक 65
 
 
श्लोक  2.1.65 
সর্ব অঙ্গ মহা-কম্প পুলকে পূর্ণিত
’হা কৃষ্ণ!’ বলিযা মাত্র পডিলা ভূমিত
सर्व अङ्ग महा-कम्प पुलके पूर्णित
’हा कृष्ण!’ बलिया मात्र पडिला भूमित
 
 
अनुवाद
उसका सारा शरीर काँपने लगा और उसके सारे रोंगटे खड़े हो गए। 'हे कृष्ण!' पुकारते हुए वह ज़मीन पर गिर पड़ा।
 
His whole body trembled, and all his hairs stood on end. He fell to the ground, crying out, "O Krishna!"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)