श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 1: भगवान के प्रतिष्ठान का प्रारंभ और कृष्ण-संकीर्तन पर निर्देश  »  श्लोक 62
 
 
श्लोक  2.1.62 
পরম-বিরক্ত-রূপ সকল সম্ভাষ
তিলার্ধেক ঔদ্ধত্যের নাহিক প্রকাশ
परम-विरक्त-रूप सकल सम्भाष
तिलार्धेक औद्धत्येर नाहिक प्रकाश
 
 
अनुवाद
"उन्होंने जो कुछ भी कहा, उससे संसार के प्रति उनकी घोर घृणा प्रकट हुई। उन्होंने एक क्षण के लिए भी अहंकार नहीं दिखाया।"
 
"Everything he said revealed his utter contempt for the world. He never showed arrogance for a moment."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)