श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 1: भगवान के प्रतिष्ठान का प्रारंभ और कृष्ण-संकीर्तन पर निर्देश  »  श्लोक 60
 
 
श्लोक  2.1.60 
পরম-অদ্ভুত কথা, মহা অসম্ভব
’নিমাই-পণ্ডিত হৈলা পরম বৈষ্ণব’
परम-अद्भुत कथा, महा असम्भव
’निमाइ-पण्डित हैला परम वैष्णव’
 
 
अनुवाद
“एक अत्यंत अद्भुत और असंभव घटना घटित हुई है: निमाई पंडित सबसे महान वैष्णव बन गए हैं।
 
“A most wonderful and impossible event has occurred: Nimai Pandita has become the greatest Vaishnava.
तात्पर्य
“वही निमाई पण्डित जो कुछ दिन पहले तर्कशास्त्रियों के शिरोमणि थे और वैष्णवों का विद्रूप और चुटकी लेने वाली भाषा में उपहास करते थे अब स्वयं एक महान वैष्णव बन चुके हैं।”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)