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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 1: भगवान के प्रतिष्ठान का प्रारंभ और कृष्ण-संकीर्तन पर निर्देश
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श्लोक 57
श्लोक
2.1.57
হেনৈ সমযে আসি’ শ্রীমান্-পণ্ডিত
হাসিতে হাসিতে আসি’ হৈলা বিদিত
हेनै समये आसि’ श्रीमान्-पण्डित
हासिते हासिते आसि’ हैला विदित
अनुवाद
उसी समय श्रीमान पंडितजी मुस्कुराते हुए वहां पहुंचे।
At the same time, Mr. Panditji arrived there smiling.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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