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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 1: भगवान के प्रतिष्ठान का प्रारंभ और कृष्ण-संकीर्तन पर निर्देश
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श्लोक 52
श्लोक
2.1.52
যথা কৃত্য করি’ ঊষঃ-কালে সাজি
লৈযাচলিলা তুলিতে পুষ্প হরষিত হৈযা
यथा कृत्य करि’ ऊषः-काले साजि
लैयाचलिला तुलिते पुष्प हरषित हैया
अनुवाद
अगली सुबह जल्दी ही अपना काम निपटाने के बाद, वह एक टोकरी लेकर खुशी-खुशी फूल इकट्ठा करने चला गया।
The next morning, after finishing his work early, he happily took a basket and went to collect flowers.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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