श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 1: भगवान के प्रतिष्ठान का प्रारंभ और कृष्ण-संकीर्तन पर निर्देश  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  2.1.5 
জয নিত্যানন্দের বান্ধব ধন প্রাণ
জয গদাধর-অদ্বৈতের প্রেম-ধাম
जय नित्यानन्देर बान्धव धन प्राण
जय गदाधर-अद्वैतेर प्रेम-धाम
 
 
अनुवाद
उन प्रभु की जय हो, जो नित्यानंद के मित्र, धन और प्राण हैं! गदाधर और अद्वैत प्रेम के धाम की जय हो!
 
Glory to the Lord who is the friend, wealth, and life of Nityananda! Glory to Gadadhara and the abode of non-dual love!
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)