श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 1: भगवान के प्रतिष्ठान का प्रारंभ और कृष्ण-संकीर्तन पर निर्देश  »  श्लोक 48
 
 
श्लोक  2.1.48 
’প্রেম-বৃষ্টি করিতে প্রভুর শুভারম্ভ’
ধ্বনি শুনি’ যায যথা ভাগবত-বৃন্দ
’प्रेम-वृष्टि करिते प्रभुर शुभारम्भ’
ध्वनि शुनि’ याय यथा भागवत-वृन्द
 
 
अनुवाद
भगवान के प्रेम वितरण की शुभ शुरुआत के बारे में सुनकर भक्तगण तुरंत आ गए।
 
Devotees immediately came after hearing about the auspicious beginning of the distribution of God's love.
तात्पर्य
सभी जीवों पर तरस करके, भगवान ने एक शुभ मुहूर्त पर भगवान के प्रेम की वर्षा शुरू की। जैसे ही यह खबर प्रसारित हुई, भक्त तुरंत उन्हें देखने के लिए आए।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)