श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 1: भगवान के प्रतिष्ठान का प्रारंभ और कृष्ण-संकीर्तन पर निर्देश  »  श्लोक 47
 
 
श्लोक  2.1.47 
আরম্ভিলা মহাপ্রভু আপন-প্রকাশ
অনন্ত ব্রহ্মাণ্দ-ময হৈল উল্লাস
आरम्भिला महाप्रभु आपन-प्रकाश
अनन्त ब्रह्माण्द-मय हैल उल्लास
 
 
अनुवाद
जैसे ही परम प्रभु ने स्वयं को प्रकट करना आरम्भ किया, असंख्य ब्रह्माण्ड आनन्दित हो उठे।
 
As soon as the Supreme Lord began to reveal Himself, countless universes rejoiced.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)