श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 1: भगवान के प्रतिष्ठान का प्रारंभ और कृष्ण-संकीर्तन पर निर्देश  »  श्लोक 46
 
 
श्लोक  2.1.46 
কিছু নাহি বুঝে আই কোন্ বা কারণ
কর-যোডে লৈলা আই গোবিন্দ-শরণ
किछु नाहि बुझे आइ कोन् वा कारण
कर-योडे लैला आइ गोविन्द-शरण
 
 
अनुवाद
उनकी माता कुछ समझ नहीं सकीं, इसलिए उन्होंने हाथ जोड़कर गोविंदा से रक्षा की याचना की।
 
His mother could not understand anything, so she folded her hands and pleaded to Govinda for protection.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)