भक्तिः परेशानुभवो विरक्ति-
रन्यत्र चैष त्रिक एक-कालः
प्रपद्यमानस्य यथाऽश्रतः स्यु-
स्तुष्टिः पुष्टिः क्षुद-अपायोऽनु-घासम्
"भक्ति, परम भगवान का प्रत्यक्ष अनुभव, और अन्य वस्तुओं से वैराग्य – ये तीनों एक साथ उस व्यक्ति के लिए घटित होते हैं जिसने परम भगवान का आश्रय लिया हो, उसी प्रकार जिस प्रकार एक व्यक्ति के लिए आनंद, पोषण और भूख से मुक्ति एक साथ घटित और बढ़ती रहती है, प्रत्येक ग्रास के साथ जो भोजन करने में संलग्न होता है।"
