श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 1: भगवान के प्रतिष्ठान का प्रारंभ और कृष्ण-संकीर्तन पर निर्देश  »  श्लोक 419
 
 
श्लोक  2.1.419 
ক্ষণেকে হৈলা বাহ্য বিশ্বম্ভর-রায
সবে প্রভু ’কৃষ্ণ কৃষ্ণ’ বলযে সদায
क्षणेके हैला बाह्य विश्वम्भर-राय
सबे प्रभु ’कृष्ण कृष्ण’ बलये सदाय
 
 
अनुवाद
कुछ समय पश्चात् भगवान विश्वम्भर को अपनी बाह्य चेतना पुनः प्राप्त हुई, किन्तु वे निरन्तर कृष्ण नाम का जप करते रहे।
 
After some time, Lord Visvambhara regained his external consciousness, but he continued chanting the name of Krishna.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)