श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 1: भगवान के प्रतिष्ठान का प्रारंभ और कृष्ण-संकीर्तन पर निर्देश  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  2.1.40 
কলি সবে শুক্লাম্বর-ব্রহ্মচারী ঘরে
তুমি আর সদাশিব আসিহ সত্বরে”
कलि सबे शुक्लाम्बर-ब्रह्मचारी घरे
तुमि आर सदाशिव आसिह सत्वरे”
 
 
अनुवाद
“आप और सदाशिव कल सुबह शुक्लम्बर ब्रह्मचारी के घर आएँ।”
 
“You and Sadashiv should come to Shuklamber Brahmachari's house tomorrow morning.”
तात्पर्य
यदि इस पद्य में तुमी शब्द एकवचन रूप में स्वीकृत किया जाय तो यह श्रीमान पण्डित को ही इंगित करता होगा (आगे का पद 70 देखिए) ।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)