श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 1: भगवान के प्रतिष्ठान का प्रारंभ और कृष्ण-संकीर्तन पर निर्देश  »  श्लोक 397
 
 
श्लोक  2.1.397 
সে-সব কৃষ্ণের দাস,—জানিহ নিশ্চয
কৃষ্ণ যারে পডাযেন, সে কি অন্য হয?
से-सब कृष्णेर दास,—जानिह निश्चय
कृष्ण यारे पडायेन, से कि अन्य हय?
 
 
अनुवाद
यह निश्चय जान लो कि वे सभी कृष्ण के सनातन सेवक हैं। जब स्वयं कृष्ण उन्हें शिक्षा दे रहे हैं, तो क्या वे कोई और हो सकते हैं?
 
Know for certain that they are all eternal servants of Krishna. When Krishna himself is teaching them, can they be anyone else?
तात्पर्य
पिछला 346 वां पद देखें।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)