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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 1: भगवान के प्रतिष्ठान का प्रारंभ और कृष्ण-संकीर्तन पर निर्देश
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श्लोक 395
श्लोक
2.1.395
প্রভুর অমৃত-বাক্য শুনি’ শিষ্য-গণ
পরম-আনন্দ-মন হৈল তত-ক্ষণ
प्रभुर अमृत-वाक्य शुनि’ शिष्य-गण
परम-आनन्द-मन हैल तत-क्षण
अनुवाद
भगवान के अमृतमय वचन सुनकर विद्यार्थी आनंद से भर गए।
The students were filled with joy after listening to the nectar-like words of God.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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