श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 1: भगवान के प्रतिष्ठान का प्रारंभ और कृष्ण-संकीर्तन पर निर्देश  »  श्लोक 393
 
 
श्लोक  2.1.393 
যে পডিলা, সে-ই ভাল, আর কার্য নাই
সবে মেলি ’কৃষ্ণ’ বলিবাণ এক ঠাঙি
ये पडिला, से-इ भाल, आर कार्य नाइ
सबे मेलि ’कृष्ण’ बलिबाण एक ठाङि
 
 
अनुवाद
"जो कुछ भी तुमने सीखा है, वह पर्याप्त है। आगे अध्ययन की कोई आवश्यकता नहीं है। अब आओ, हम सब मिलकर कृष्ण के नामों का जप करें।"
 
"Whatever you have learned is enough. There is no need for further study. Now come, let us all chant the names of Krishna together."
तात्पर्य
कार्या शब्द का अर्थ "आवश्यकता" या "ज़रूरत" होता है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)