श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 1: भगवान के प्रतिष्ठान का प्रारंभ और कृष्ण-संकीर्तन पर निर्देश  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  2.1.39 
তোমা সবা সহিত নিভৃত এক স্থানে
মোর দুঃখ সকল করিব নিবেদনে
तोमा सबा सहित निभृत एक स्थाने
मोर दुःख सकल करिब निवेदने
 
 
अनुवाद
“मैं एकांत स्थान में तुम्हें अपने दुखों के बारे में बताना चाहता हूँ।
 
“I want to tell you about my sorrows in a private place.
तात्पर्य
''मैं तुमको बताऊँगा कि एकांतिक स्थान में कृष्ण के प्रेम के कारण हुआ मेरा संताप, भौतिकवादी लोगों से दूर। कोई भौतिकवादी व्यक्ति नहीं समझ सकता कि कृष्ण से बिछुड़ने से मुझे होने वाला संताप है। इसीलिए मैं अपने घायल हृदय के द्वार खोलूँगा और तुम जैसे भक्तों के सामने कृष्ण से बिछुड़ने से होने वाला दर्द जताऊँगा।''
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)