श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 1: भगवान के प्रतिष्ठान का प्रारंभ और कृष्ण-संकीर्तन पर निर्देश  »  श्लोक 388
 
 
श्लोक  2.1.388 
শিষ্য-গণ ক্রন্দন করেন অধোমুখে
ডুবিলেন শিষ্য-গণ পরানন্দ-সুখে
शिष्य-गण क्रन्दन करेन अधोमुखे
डुबिलेन शिष्य-गण परानन्द-सुखे
 
 
अनुवाद
छात्र सिर झुकाकर रो पड़े और वे सभी दिव्य आनंद के सागर में विलीन हो गए।
 
The students bowed their heads and wept and they all merged into the ocean of divine bliss.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)