श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 1: भगवान के प्रतिष्ठान का प्रारंभ और कृष्ण-संकीर्तन पर निर्देश  »  श्लोक 387
 
 
श्लोक  2.1.387 
’হরি’ বলি’ শিষ্য-গণ করিলেন ধ্বনি
সবা কোলে করিযা কান্দেন দ্বিজ-মণি
’हरि’ बलि’ शिष्य-गण करिलेन ध्वनि
सबा कोले करिया कान्देन द्विज-मणि
 
 
अनुवाद
विद्यार्थियों ने जोर से ‘हरि, हरि’ का जाप किया। तब द्विज शिखा रत्न ने सबको गले लगाते हुए रोना शुरू कर दिया।
 
The students loudly chanted, "Hari, Hari!" Then Shikha Ratna, the twice-born disciple, began to cry, embracing everyone.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)