श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 1: भगवान के प्रतिष्ठान का प्रारंभ और कृष्ण-संकीर्तन पर निर्देश  »  श्लोक 384
 
 
श्लोक  2.1.384 
“তোমার মুখেতে যত শুনিলুঙ্ ব্যাখ্যান
জন্মে-জন্মে হৃদযে রহুক সেই ধ্যান
“तोमार मुखेते यत शुनिलुङ् व्याख्यान
जन्मे-जन्मे हृदये रहुक सेइ ध्यान
 
 
अनुवाद
“जो व्याख्याएं हमने आपसे सुनी हैं, वे जन्म-जन्मांतर तक हमारे हृदय में बनी रहें।
 
“May the explanations we have heard from you remain in our hearts for many births.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)