श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 1: भगवान के प्रतिष्ठान का प्रारंभ और कृष्ण-संकीर्तन पर निर्देश  »  श्लोक 378
 
 
श्लोक  2.1.378 
তোমা সবাকার—যাঙ্র স্থানে চিত্ত লয
তাঙ্র স্থানে পড’—আমি দিলাঙ নির্ভয
तोमा सबाकार—याङ्र स्थाने चित्त लय
ताङ्र स्थाने पड’—आमि दिलाङ निर्भय
 
 
अनुवाद
“मैं तुम्हें बिना किसी डर के जिससे चाहो, उसके साथ अध्ययन करने की अनुमति देता हूँ।
 
“I allow you to study with whomever you want without any fear.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)