श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 1: भगवान के प्रतिष्ठान का प्रारंभ और कृष्ण-संकीर्तन पर निर्देश  »  श्लोक 375-376
 
 
श्लोक  2.1.375-376 
কৃষ্ণ-বর্ণ এক শিশু মুরলী বাজায
সবে দেখি,—তাই ভাই! বলি সর্বথায
যত শুনি শ্রবণে, সকল—কৃষ্ণ-নাম
সকল ভুবন দেখি গোবিন্দের ধাম
कृष्ण-वर्ण एक शिशु मुरली बाजाय
सबे देखि,—ताइ भाइ! बलि सर्वथाय
यत शुनि श्रवणे, सकल—कृष्ण-नाम
सकल भुवन देखि गोविन्देर धाम
 
 
अनुवाद
"हे बंधुओं, मैं ऐसा इसलिए कह रहा हूँ क्योंकि मुझे बस एक श्यामवर्णी बालक बांसुरी बजाता हुआ दिखाई दे रहा है। मैं केवल कृष्ण का नाम सुन रहा हूँ और मुझे सारा जगत गोविंद का निवास दिखाई दे रहा है।
 
"My friends, I am saying this because I see only a dark-skinned boy playing the flute. I hear only the name of Krishna, and I see the entire universe as the abode of Govinda.
तात्पर्य
श्री गौरसुन्दर कह रहे हैं, "मैं हमेशा एक काले रंग के युवा लड़के को देखता हूँ जो अपनी बाँसुरी की धुन से सभी को आकर्षित करता है। चूँकि मैं लगातार उसे ही देखता हूँ, मैं हमेशा उसका नाम जपता हूँ और उसकी महिमा गाता हूँ। आपके कानों में प्रवेश करने वाला ध्वनि कंपन केवल कृष्ण के नाम हैं; और भौतिक दुनिया, भोग-विलास का क्षेत्र, जिसे आप वर्तमान में अपने चारों ओर देख रहे हैं, वास्तव में आपके आनंद के लिए जगह नहीं है, बल्कि यह वैकुण्ठ-गोलोक है, कृष्ण के आनंद का स्थान है।"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)