श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 1: भगवान के प्रतिष्ठान का प्रारंभ और कृष्ण-संकीर्तन पर निर्देश  »  श्लोक 369
 
 
श्लोक  2.1.369 
প্রভু বলে,—“দশ দিন পাঠ বাদ যায!
তবে ত’ আমারে সবে কহিতে যুযায?”
प्रभु बले,—“दश दिन पाठ वाद याय!
तबे त’ आमारे सबे कहिते युयाय?”
 
 
अनुवाद
प्रभु ने कहा, "तुम्हारी पढ़ाई दस दिन से रुकी हुई है! क्या तुम्हें मुझे इसकी सूचना नहीं देनी चाहिए थी?"
 
The Lord said, "Your studies have been interrupted for ten days! Shouldn't you have informed me about this?"
तात्पर्य
कविता की दूसरी पंक्ति का आशय है कि " solcher स्थिति में मुझे सूचित करना आपका कर्तव्य नहीं था (पढ़ाई छोड़ने के बारे में)?"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)