श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 1: भगवान के प्रतिष्ठान का प्रारंभ और कृष्ण-संकीर्तन पर निर्देश  »  श्लोक 364
 
 
श्लोक  2.1.364 
সবে মেলি’ ধরিলেন করিযাশকতি
ক্ষণেকে তোমার আসি’ বাহ্য হৈল মতি
सबे मेलि’ धरिलेन करियाशकति
क्षणेके तोमार आसि’ बाह्य हैल मति
 
 
अनुवाद
“तब उन्होंने अपनी पूरी ताकत से आपको स्थिर रखा, और कुछ ही देर बाद आपको बाहरी चेतना वापस मिल गई।
 
“Then he held you steady with all his might, and after a while you regained external consciousness.
तात्पर्य
पद्य की दूसरी पंक्ति कहती है कि थोड़े समय के बाद उसकी बाहरी चेतना वापस आ गई।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)