श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 1: भगवान के प्रतिष्ठान का प्रारंभ और कृष्ण-संकीर्तन पर निर्देश  »  श्लोक 361
 
 
श्लोक  2.1.361 
আপাদমস্তক হৈল পুলকে উন্নতি
লালা-ঘর্ম-ধূলায ব্যাপিত গৌর-মূর্তি
आपादमस्तक हैल पुलके उन्नति
लाला-घर्म-धूलाय व्यापित गौर-मूर्ति
 
 
अनुवाद
“आपके पूरे शरीर के रोंगटे खड़े हो गए, और आपका सुनहरा रूप पसीने, लार और धूल से सना हुआ था।
 
“Your entire body was covered in goosebumps, and your golden form was stained with sweat, saliva, and dust.
तात्पर्य
प्रेरणा के कारण कंपन का अर्थ है, "बालों का खड़ा होना।"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)