श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 1: भगवान के प्रतिष्ठान का प्रारंभ और कृष्ण-संकीर्तन पर निर्देश  »  श्लोक 360
 
 
श्लोक  2.1.360 
শেষে যে বা কম্প আসি’ হৈল তোমার
শত জন সমর্থ না হয ধরিবার
शेषे ये वा कम्प आसि’ हैल तोमार
शत जन समर्थ ना हय धरिबार
 
 
अनुवाद
“जब आप अंततः कांपने लगे, तो सौ व्यक्ति भी आपको स्थिर नहीं रख सके।
 
“When you finally started shaking, not even a hundred people could keep you still.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)