श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 1: भगवान के प्रतिष्ठान का प्रारंभ और कृष्ण-संकीर्तन पर निर्देश  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  2.1.36 
শ্রী-কৃষ্ণের অনুগ্রহ হৈল ইহানে
কি বৈভব পথে বা হৈল দরশনে”
श्री-कृष्णेर अनुग्रह हैल इहाने
कि वैभव पथे वा हैल दरशने”
 
 
अनुवाद
“उसे अवश्य ही भगवान कृष्ण की कृपा प्राप्त हुई होगी, या शायद उसने रास्ते में कुछ अद्भुत देखा होगा।”
 
“He must have received the blessings of Lord Krishna, or perhaps he saw something wonderful on the way.”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)