श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 1: भगवान के प्रतिष्ठान का प्रारंभ और कृष्ण-संकीर्तन पर निर्देश  »  श्लोक 358
 
 
श्लोक  2.1.358 
ভাগবত-শ্লোক শুনি’ হৈলা মূর্ছিত
সর্ব-অঙ্গে নাহি প্রাণ, আমরা বিস্মিত
भागवत-श्लोक शुनि’ हैला मूर्छित
सर्व-अङ्गे नाहि प्राण, आमरा विस्मित
 
 
अनुवाद
श्रीमद्भागवत के उस श्लोक को सुनते ही आप अचेत हो गए। हमें यह देखकर आश्चर्य हुआ कि आपके शरीर में जीवन के कोई लक्षण दिखाई नहीं दे रहे थे।
 
Upon hearing that verse from the Srimad Bhagavatam, you fell unconscious. We were astonished to see that your body showed no signs of life.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)