श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 1: भगवान के प्रतिष्ठान का प्रारंभ और कृष्ण-संकीर्तन पर निर्देश  »  श्लोक 356
 
 
श्लोक  2.1.356 
যে কম্প, যে অশ্রু, যে বা পুলক তোমার
আমরা ত’ কোথা কভু নাহি দেখি আর
ये कम्प, ये अश्रु, ये वा पुलक तोमार
आमरा त’ कोथा कभु नाहि देखि आर
 
 
अनुवाद
“हमने पहले कभी प्रेम के आंसू, सिहरन और रोंगटे खड़े होते नहीं देखे जो आप प्रकट करते हैं।
 
“We have never seen the tears, the shivers, the goosebumps of love that you reveal before.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)