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श्लोक 2.1.354  |
ভক্তির শ্রবণে যে তোমার আসি’ হযে
তাহাতে তোমারে কভু নর-জ্ঞান নহে” |
भक्तिर श्रवणे ये तोमार आसि’ हये
ताहाते तोमारे कभु नर-ज्ञान नहे” |
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| अनुवाद |
| भक्ति के विषय में सुनते समय आपमें जो परिवर्तन आते हैं, उसके कारण कोई भी आपको कभी भी साधारण मनुष्य नहीं मान सकता। |
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| Because of the changes that occur in you when you hear about devotion, no one can ever consider you an ordinary human being. |
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