श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 1: भगवान के प्रतिष्ठान का प्रारंभ और कृष्ण-संकीर्तन पर निर्देश  »  श्लोक 345
 
 
श्लोक  2.1.345 
মোহিত পডুযা-সব শুনে এক-মনে
দ্বিরুক্তি করিতে কারো না আইসে বদনে
मोहित पडुया-सब शुने एक-मने
द्विरुक्ति करिते कारो ना आइसे वदने
 
 
अनुवाद
मंत्रमुग्ध विद्यार्थियों ने भगवान का स्पष्टीकरण ध्यानपूर्वक सुना। उनमें से किसी ने भी मुँह खोलने का साहस नहीं किया।
 
The mesmerized students listened attentively to the Lord's explanation. None of them dared to open their mouths.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)