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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 1: भगवान के प्रतिष्ठान का प्रारंभ और कृष्ण-संकीर्तन पर निर्देश
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श्लोक 34
श्लोक
2.1.34
চতুর্-দিকে নযনে বহযে প্রেম-ধার
গঙ্গা যেন আসিযা করিলা অবতার
चतुर्-दिके नयने बहये प्रेम-धार
गङ्गा येन आसिया करिला अवतार
अनुवाद
भगवान के नेत्रों से प्रेमाश्रु चारों दिशाओं में बहने लगे, मानो गंगाजी वहाँ प्रकट हो गई हों।
Tears of love started flowing from the eyes of the Lord in all directions, as if Gangaji had appeared there.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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