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श्लोक 2.1.34  |
চতুর্-দিকে নযনে বহযে প্রেম-ধার
গঙ্গা যেন আসিযা করিলা অবতার |
चतुर्-दिके नयने बहये प्रेम-धार
गङ्गा येन आसिया करिला अवतार |
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| अनुवाद |
| भगवान के नेत्रों से प्रेमाश्रु चारों दिशाओं में बहने लगे, मानो गंगाजी वहाँ प्रकट हो गई हों। |
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| Tears of love started flowing from the eyes of the Lord in all directions, as if Gangaji had appeared there. |
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