श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 1: भगवान के प्रतिष्ठान का प्रारंभ और कृष्ण-संकीर्तन पर निर्देश  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  2.1.33 
শ্রীমান্ পণ্ডিত-আদি যত ভক্ত-গণ
দেখেন অপূর্ব কৃষ্ণ-প্রেমের ক্রন্দন
श्रीमान् पण्डित-आदि यत भक्त-गण
देखेन अपूर्व कृष्ण-प्रेमेर क्रन्दन
 
 
अनुवाद
श्रीमान पंडित और अन्य भक्तगण देख रहे थे कि भगवान कृष्ण के प्रति तीव्र प्रेम से भरकर रो रहे हैं।
 
Mr. Pandit and other devotees watched as he wept with intense love for Lord Krishna.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)