श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 1: भगवान के प्रतिष्ठान का प्रारंभ और कृष्ण-संकीर्तन पर निर्देश  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  2.1.32 
পুলকে পূর্ণিত হৈল সর্ব-কলেবর
স্থির নহে প্রভু কম্প-ভরে থর-থর
पुलके पूर्णित हैल सर्व-कलेवर
स्थिर नहे प्रभु कम्प-भरे थर-थर
 
 
अनुवाद
भगवान का पूरा शरीर रोंगटे खड़े होने से सजा हुआ था, और वे स्थिर रहने में असमर्थ थे क्योंकि उनका शरीर तीव्र रूप से कांपने लगा था।
 
The Lord's entire body was covered in goosebumps, and he was unable to remain still as his body began to tremble violently.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)