श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 1: भगवान के प्रतिष्ठान का प्रारंभ और कृष्ण-संकीर्तन पर निर्देश  »  श्लोक 318-319
 
 
श्लोक  2.1.318-319 
যমুনার তীরে যেন বেডি’ গোপ-গণ
নানা-ক্রীডা করিলেন নন্দের নন্দন
সেই-মত শচীর নন্দন গঙ্গা-তীরে
ভক্তের সহিত কৃষ্ণ-প্রসঙ্গে বিহরে
यमुनार तीरे येन बेडि’ गोप-गण
नाना-क्रीडा करिलेन नन्देर नन्दन
सेइ-मत शचीर नन्दन गङ्गा-तीरे
भक्तेर सहित कृष्ण-प्रसङ्गे विहरे
 
 
अनुवाद
जिस प्रकार महाराज नन्द के पुत्र यमुना के तट पर ग्वालबालों से घिरे हुए विभिन्न क्रीड़ाओं का आनन्द लेते थे, उसी प्रकार शची के पुत्र गंगा के तट पर अपने भक्तों से घिरे हुए कृष्ण विषयक चर्चाओं का आनन्द लेते थे।
 
Just as the sons of Maharaja Nanda enjoyed various sports surrounded by cowherd boys on the banks of the Yamuna, similarly the sons of Sachi enjoyed discussions about Krishna surrounded by their devotees on the banks of the Ganga.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas