श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 1: भगवान के प्रतिष्ठान का प्रारंभ और कृष्ण-संकीर्तन पर निर्देश  »  श्लोक 317
 
 
श्लोक  2.1.317 
গঙ্গা নমস্করি’ গঙ্গা-জল নিলাশিরে
গোষ্ঠীর সহিত বসিলেন গঙ্গা-তীরে
गङ्गा नमस्करि’ गङ्गा-जल निलाशिरे
गोष्ठीर सहित वसिलेन गङ्गा-तीरे
 
 
अनुवाद
उन्होंने गंगा को प्रणाम किया और अपने सिर पर जल छिड़का। फिर वे अपने साथियों के साथ गंगा के तट पर बैठ गए।
 
He bowed to the Ganges and sprinkled water on his head. Then he sat down on the banks of the Ganges with his companions.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)