श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 1: भगवान के प्रतिष्ठान का प्रारंभ और कृष्ण-संकीर्तन पर निर्देश  »  श्लोक 315
 
 
श्लोक  2.1.315 
কি বলিতে পারি আমা সবার শকতি”
আপ্ত-গণে নিবারিল,—“না করিহ স্তুতি”
कि बलिते पारि आमा सबार शकति”
आप्त-गणे निवारिल,—“ना करिह स्तुति”
 
 
अनुवाद
“आपके कार्यों को समझाने की हममें क्या शक्ति है?” भगवान के अंतरंग सहयोगियों ने हस्तक्षेप करते हुए कहा, “उनकी स्तुति में मत लगिए।”
 
"What power do we have to explain your actions?" The Lord's intimate associates intervened, saying, "Do not engage in His praise."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)