श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 1: भगवान के प्रतिष्ठान का प्रारंभ और कृष्ण-संकीर्तन पर निर्देश  »  श्लोक 310
 
 
श्लोक  2.1.310 
পুনঃ পুনঃ পডে শ্লোক প্রেম-যুক্ত হৈযা
“বল বল” বলে প্রভু হুঙ্কার করিযা
पुनः पुनः पडे श्लोक प्रेम-युक्त हैया
“बल बल” बले प्रभु हुङ्कार करिया
 
 
अनुवाद
जब ब्राह्मण ने बार-बार प्रेम और भक्ति के साथ श्लोकों का पाठ किया, तो भगवान ने ऊंचे स्वर में कहा, “पढ़ते रहो, पढ़ते रहो।”
 
When the Brahmin repeatedly recited the verses with love and devotion, the Lord said in a loud voice, “Keep reading, keep reading.”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)