श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 1: भगवान के प्रतिष्ठान का प्रारंभ और कृष्ण-संकीर्तन पर निर्देश  »  श्लोक 305
 
 
श्लोक  2.1.305 
লোচনের জলে হৈল পৃথিবী সিঞ্চিত
অশ্রু-কম্প-পুলক-সকল সুবিদিত
लोचनेर जले हैल पृथिवी सिञ्चित
अश्रु-कम्प-पुलक-सकल सुविदित
 
 
अनुवाद
पृथ्वी भगवान के आँसुओं से भीग गई, जिनमें आँसू, कंपकंपी और रोंगटे खड़े होने जैसे आनंदपूर्ण लक्षण प्रकट हुए।
 
The earth was drenched with the Lord's tears, manifesting joyful symptoms such as tears, tremors and goosebumps.
तात्पर्य
सुविदिता शब्द का अर्थ है"वे स्पष्ट रूप से प्रकट हुए थे"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)