श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 1: भगवान के प्रतिष्ठान का प्रारंभ और कृष्ण-संकीर्तन पर निर्देश  »  श्लोक 300
 
 
श्लोक  2.1.300 
ভক্তি-যোগে শ্লোক পডে পরম-সন্তোষে
প্রভুর কর্ণেতে আসি’ করিল প্রবেশে
भक्ति-योगे श्लोक पडे परम-सन्तोषे
प्रभुर कर्णेते आसि’ करिल प्रवेशे
 
 
अनुवाद
जब उन्होंने बड़ी संतुष्टि के साथ भक्तिपूर्वक श्रीमद्भागवत के श्लोकों का पाठ किया, तो उनके पाठ की ध्वनि भगवान के कानों में प्रवेश कर गई।
 
When he recited the verses of Srimad Bhagavatam with great satisfaction and devotion, the sound of his recitation entered the ears of the Lord.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)