श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 1: भगवान के प्रतिष्ठान का प्रारंभ और कृष्ण-संकीर्तन पर निर्देश  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  2.1.30 
শেষে প্রভু হৈলেন বড অসম্বর
’কৃষ্ণ’ বলি’ কান্দিতে লাগিলা বহুতর
शेषे प्रभु हैलेन बड असम्बर
’कृष्ण’ बलि’ कान्दिते लागिला बहुतर
 
 
अनुवाद
अंततः भगवान अपना संयम खो बैठे और कृष्ण का नाम पुकारते हुए जोर-जोर से रोने लगे।
 
Ultimately the Lord lost his composure and started crying loudly calling out the name of Krishna.
तात्पर्य
असंभार शब्द का अर्थ है "अपने आप को नियंत्रित करने में असमर्थ होना", दूसरे शब्दों में, "सारा धैर्य खोना" या "अपने आप को छुपाना"।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)