তিন পুত্র তাঙ্র কৃষ্ণ-পদ-মকরন্দ
কৃষ্ণানন্দ, জীব, যদুনাথ-কবিচন্দ্র
तिन पुत्र ताङ्र कृष्ण-पद-मकरन्द
कृष्णानन्द, जीव, यदुनाथ-कविचन्द्र
अनुवाद
उनके तीन पुत्र - कृष्णानंद, जीव और यदुनाथ कविचंद्र - कृष्ण के चरण कमलों पर मधुमक्खियों की तरह रहते थे।
His three sons – Krishnananda, Jiva and Yadunath Kavichandra – lived like bees at the lotus feet of Krishna.
तात्पर्य
कृष्णानंद, गंगादास पंडितजी के प्रमुख शिष्यों में से एक थे (आदि-खंड 8.38)। जगई और माधाई के उद्धार के पश्चात वे जल में विहार करते हुए प्रभु और उनके साथियों से मिले (मध्य-खंड 13.337), और वे नित्यानंद प्रभु के एक साथी थे (चै. च. आदि 11.50)। जीव (पंडित) के संदर्भ में, अंत्य-खंड (5.751) में लिखा है: ''जीव पंडित उदार और अति भाग्यशाली थे। भगवान नित्यानंद ने उनके घर में विविध लीलाओं का आनंद लिया।'' चैतन्य चरितामृत (आदि 11.44) में लिखा है: ''श्री जीव पंडित ने श्री नित्यानंद प्रभु के गुणों का गुणगान किया।'' गौरा-गणोद्देश-दीपिका (169) के अनुसार वे कृष्ण की लीलाओं में वृजवासी इंदिरा के रूप में अवतरित हुए थे। यदुनंदन कविचंद्र के बारे में, अंत्य-खंड (5.735) में लिखा है: ''यदुनंदन कविचंद्र कृष्ण के लिए प्रेम के अलौकिक भावों से पूर्ण थे। नित्यानंद निरंतर उन पर अपनी कृपा बरसाते थे।'' चैतन्य चरितामृत (आदि 11.35) में लिखा है: ''यदुनंदन कविचंद्र एक महान भक्त थे। भगवान नित्यानंद प्रभु हमेशा उनके हृदय में नृत्य करते थे।''
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥