श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 1: भगवान के प्रतिष्ठान का प्रारंभ और कृष्ण-संकीर्तन पर निर्देश  »  श्लोक 296
 
 
श्लोक  2.1.296 
’রত্নগর্ভ-আচার্য’ বিখ্যাত তাঙ্র নাম
প্রভুর পিতার সঙ্গী, জন্ম—এক গ্রাম
’रत्नगर्भ-आचार्य’ विख्यात ताङ्र नाम
प्रभुर पितार सङ्गी, जन्म—एक ग्राम
 
 
अनुवाद
वे रत्नगर्भ आचार्य के नाम से सुप्रसिद्ध थे और भगवान के पिता के मित्र थे, क्योंकि उनका जन्म भी उसी गांव में हुआ था।
 
He was famous by the name of Ratnagarbha Acharya and was a friend of the Lord's father, as he was also born in the same village.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)